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दिवाली 2026 · Diwali VastuRead in English

दिवाली वास्तु टिप्स 2026: हर दिशा में लक्ष्मी का स्वागत

दिवाली पर वास्तु सबसे ज़्यादा मायने रखता है — घर की सफ़ाई होती है, सामान बदला जाता है और माँ लक्ष्मी के लिए दीये जलाए जाते हैं। यह चेकलिस्ट बताती है कि लक्ष्मी पूजा कहाँ करें, दीये कहाँ रखें, कौन-से कोने पहले साफ़ करें और किन बातों से बचें — दिशा के अनुसार।

Vastu Laabh टीम द्वारा · 21 अक्टूबर 2026

दिवाली 2026 की तिथियाँ

2026 में दीपोत्सव के पाँच दिन:

शुक्रवार, 6 नवंबरधनतेरसधातु, चाँदी या सोना खरीदें। शाम को दक्षिण दिशा की ओर यम दीपक जलाएँ।
शनिवार, 7 नवंबरछोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी)सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान; अंधकार दूर करने के लिए दीये जलाएँ।
रविवार, 8 नवंबरदिवाली — लक्ष्मी पूजाअमावस्या पर, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा।
सोमवार, 9 नवंबरगोवर्धन पूजाअन्नकूट भोग और गोवर्धन पूजा।
मंगलवार, 10 नवंबरभाई दूजभाई को तिलक और उसकी मंगलकामना।

8 नवंबर को लक्ष्मी पूजा का समय: सूर्यास्त और प्रदोष काल

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में की जाती है — सूर्यास्त के बाद के 2 घंटे 24 मिनट, और उत्तम है जब स्थिर वृषभ लग्न हो। हर शहर में सूर्यास्त अलग समय पर होता है, इसलिए प्रदोष काल भी। नीचे के समय रविवार, 8 नवंबर 2026 को हर शहर के अपने सूर्यास्त से निकाले गए हैं:

शहरसूर्यास्तप्रदोष काल
नई दिल्लीशाम 5:31शाम 5:31 – शाम 7:55
मुंबईशाम 6:02शाम 6:02 – रात 8:26
कोलकाताशाम 4:55शाम 4:55 – शाम 7:19
चेन्नईशाम 5:40शाम 5:40 – रात 8:04
बेंगलुरुशाम 5:51शाम 5:51 – रात 8:15
जयपुरशाम 5:39शाम 5:39 – रात 8:03
लखनऊशाम 5:19शाम 5:19 – शाम 7:43
अहमदाबादशाम 5:58शाम 5:58 – रात 8:22

अलग-अलग पंचांग प्रदोष काल के भीतर लक्ष्मी पूजा का थोड़ा अलग समय देते हैं। सटीक मुहूर्त अपने पारिवारिक पंडित जी या उस दिन अपने शहर के पंचांग से ज़रूर देख लें।

लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे अच्छी दिशा

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) घर का सबसे पवित्र कोना है और दिवाली पूजा के लिए पहली पसंद है। दूसरी पसंद उत्तर दिशा है, जो धन के देवता कुबेर की है।

पूजा ईशान कोण या उत्तर में रखें

कोने को अच्छी तरह साफ़ करें और ऊँची चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ। अगर ईशान में शौचालय या स्टोर है, तो बैठक के उत्तर या पूर्व भाग का उपयोग करें।

मूर्तियों का मुख पश्चिम या पूर्व की ओर

लक्ष्मी और गणेश जी को ऐसे रखें कि पूजा करते समय आपका मुख ईशान, उत्तर या पूर्व की ओर हो। पूजा में दक्षिण की ओर मुख न करें।

गणेश जी के दाईं ओर लक्ष्मी जी

पहले गणेश जी को स्थापित करें, उनके दाईं ओर माँ लक्ष्मी, और यदि पूजते हैं तो साथ में सरस्वती या कुबेर।

ईशान में कलश रखें

पूजा के ईशान भाग में जल, आम के पत्तों और नारियल वाला ताँबे या पीतल का कलश समृद्धि और जल तत्व का प्रतीक है।

दिशा अनुसार दिवाली की सफ़ाई

वास्तु कहता है कि लक्ष्मी साफ़ और खुले घर में आती हैं। अगर कुछ ही कोनों का समय हो, तो पहले ये साफ़ करें:

ईशान कोण — भारी सामान हटाएँ

जूते, कूड़ेदान, स्टोरेज बॉक्स और टूटी चीज़ें सबसे शुभ क्षेत्र को रोकती हैं। इसे हल्का, रोशन और खुला रखें।

उत्तर — कुबेर का क्षेत्र

अव्यवस्था हटाएँ, टपकते नल ठीक करें और इस तरफ़ अच्छी रोशनी रखें। यह धन और नए अवसरों की दिशा है।

ब्रह्मस्थान — घर का केंद्र

भारी फ़र्नीचर को केंद्र से हटाएँ ताकि ऊर्जा हर कमरे तक बह सके।

नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) — भारी और स्थिर

भारी सामान यहीं रखना चाहिए। इसे साफ़ करें, लेकिन भारी और बंद ही रखें।

दिवाली से पहले बाहर करें

बंद घड़ियाँ, टूटे शीशे, खंडित मूर्तियाँ या फ़ोटो फ़्रेम, फटे कपड़े, पुराने जूते और सूखे पौधे — परंपरा से ये लक्ष्मी पूजा से पहले हटा दिए जाते हैं।

हर कमरे के नियम: मुख्य द्वार, पूजा घर, रसोई.

दिवाली पर मुख्य द्वार का वास्तु

मुख्य द्वार घर का मुख है — यहीं माँ लक्ष्मी का स्वागत होता है।

आम या अशोक के पत्तों का तोरण

दरवाज़े पर ताज़े पत्तों (या गेंदे) का तोरण लगाएँ। सूखा तोरण लगा न छोड़ें, बदल दें।

देहरी पर रंगोली

कमल या दीये वाली रंगोली मेहमानों और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करती है। लक्ष्मी जी के पदचिह्न अंदर की ओर बनाएँ।

स्वास्तिक और शुभ-लाभ

दरवाज़े पर रोली या हल्दी से स्वास्तिक बनाएँ और दोनों ओर “शुभ” और “लाभ” लिखें।

द्वार को रोशन रखें

दिवाली की रात प्रवेश द्वार पर अँधेरा नहीं होना चाहिए। नेमप्लेट, घंटी और बंद पड़ी लाइटें ठीक करें।

दिवाली पर दीये कहाँ रखें

दीये अग्नि तत्व के वाहक हैं। इन्हें वहाँ रखें जहाँ ये हर क्षेत्र को ऊर्जा दें:

मुख्य द्वार के दोनों ओर

दिवाली की शाम द्वार पर दो दीये, और सुरक्षित हो तो एक दीया रात भर जलता रहे।

ईशान कोण और पूजा स्थान

पूजा में घी का दीया और घर के ईशान कोने में एक दीया।

तुलसी, रसोई और जल

एक दीया तुलसी के पास, एक रसोई में (आग्नेय कोण अग्नि का क्षेत्र है) और एक पीने के पानी के पास।

दक्षिण की ओर यम दीपक

धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण की ओर मुख वाला चौमुखी दीया यमराज के लिए जलाया जाता है — यही एक बार है जब दीया दक्षिण की ओर होता है।

धनतेरस: क्या खरीदें और कहाँ रखें

6 नवंबर को धनतेरस धातु खरीदने के लिए साल का सबसे शुभ दिन है।

धातु, चाँदी और सोना

पीतल या ताँबे के बर्तन, लक्ष्मी-गणेश वाला चाँदी का सिक्का, या सोना। नई झाड़ू भी खरीदी जाती है, जो दरिद्रता को बाहर करती है।

तिजोरी नैऋत्य में, दरवाज़ा उत्तर की ओर

नकदी और गहने घर के दक्षिण-पश्चिम में रखें, और तिजोरी का दरवाज़ा उत्तर — कुबेर की दिशा — की ओर खुले।

लोहा, कांच और काली चीज़ें न खरीदें

परंपरा से धनतेरस पर लोहा, धारदार चीज़ें और काले कपड़े नहीं खरीदे जाते।

दिशा अनुसार दिवाली सजावट के रंग

हर दिशा के तत्व के अनुसार सजावट के रंग चुनें:

उत्तर और ईशान

सफ़ेद, क्रीम, हल्का नीला और हरा — इन क्षेत्रों को हल्का रखें।

पूर्व

हरा रंग और ताज़े फूल; तोरण और पौधे यहाँ अच्छे लगते हैं।

आग्नेय और दक्षिण

लाल, नारंगी और गुलाबी — दीये, कंदील और रंगोली के रंग।

नैऋत्य और पश्चिम

स्थिरता के लिए पीला, मिट्टी जैसा भूरा और सुनहरा; पीतल की सजावट इन दिशाओं में अच्छी है।

दिवाली पर वास्तु की ये गलतियाँ न करें

दिवाली से पहले अपने घर का वास्तु जाँचें

Vastu Laabh ऐप के साथ अपने घर में घूमें। यह फ़ोन के कम्पास से हर कमरा स्कैन करता है, वास्तु दोष ढूँढता है और बिना तोड़-फोड़ वाले उपाय बताता है — लक्ष्मी पूजा से पहले।

दिवाली वास्तु — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में दिवाली कब है?

दिवाली (लक्ष्मी पूजा) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। धनतेरस 6 नवंबर, छोटी दिवाली 7 नवंबर, गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और भाई दूज 10 नवंबर को है।

लक्ष्मी पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे अच्छा है, उसके बाद उत्तर दिशा जो कुबेर की है। मूर्तियाँ ऐसे रखें कि पूजा करते समय आपका मुख ईशान, उत्तर या पूर्व की ओर हो, दक्षिण की ओर कभी नहीं।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति का मुख किस ओर हो?

मूर्तियों का मुख पश्चिम या पूर्व की ओर हो, ताकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर रहे। लक्ष्मी जी गणेश जी के दाईं ओर विराजमान हों।

दिवाली 2026 पर लक्ष्मी पूजा का समय क्या है?

लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर 2026 को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। नई दिल्ली में सूर्यास्त लगभग शाम 5:31 बजे है, इसलिए प्रदोष काल लगभग 7:55 बजे तक रहेगा। सटीक समय शहर के अनुसार बदलता है — इस पेज की तालिका या अपने शहर का पंचांग देखें।

दिवाली पर दीये कहाँ रखने चाहिए?

मुख्य द्वार के दोनों ओर, पूजा और ईशान कोण में, तुलसी के पास, रसोई में और पीने के पानी के पास। धनतेरस की शाम यमराज के लिए दक्षिण की ओर दीया जलाया जाता है।

दिवाली से पहले क्या बाहर फेंकना चाहिए?

खंडित मूर्तियाँ और फ़ोटो फ़्रेम, टूटे शीशे, बंद घड़ियाँ, फटे कपड़े, पुराने जूते, सूखे पौधे और हर टूटी या बेकार चीज़ — ख़ासकर ईशान कोण और घर के केंद्र से।

लक्ष्मी कृपा के लिए तिजोरी कहाँ रखें?

तिजोरी या अलमारी घर या कमरे के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) में रखें, और उसका दरवाज़ा उत्तर की ओर खुले।